रिपोर्टर आकाश कुमार 

अलीगढ़ जनपद: जिला संवाददाता आकाश कुमार हाल ही में नीट परीक्षा में सामने आई गड़बड़ियों, पेपर लीक और री-एग्जाम की घोषणा ने देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरे मानसिक और आर्थिक तनाव में डाल दिया है। बार-बार परीक्षाओं का रद्द होना और सोशल मीडिया पर उड़ती अफवाहें हमारी राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली (Testing System) पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं, जिससे युवाओं का इस पूरे सिस्टम से भरोसा उठ चुका है। ऐसी अनिश्चित स्थिति में, छात्र भारत में काउंसलिंग के अंतहीन चक्रव्यूह में फंसकर अपना कीमती साल बर्बाद करने के बजाय विदेशों (जैसे रशिया, जॉर्जिया, कजाकिस्तान) में एमबीबीएस करने को एक अधिक सुरक्षित,पारदर्शी और तनाव-मुक्त विकल्प के रूप में देख रहे हैं।भारत में प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की सीमित सीटें,अत्यधिक फीस और भारी-भरकम डोनेशन के मुकाबले विदेशों में कम खर्च में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक लैब और बेहतरीन प्रैक्टिकल एक्सपोजर मिल जाता है,माननीय  केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारतीय मिडिल-क्लास परिवारों के लिए एक बहुत ही व्यावहारिक और किफायती समाधान है। 

जानकारी के मुताबिक तनीशा ग्रुप ऑफ एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड अलीगढ़ के डायरेक्टर आरिफ अली खान ने बताया कि घरेलू सिस्टम में फैली इसी गड़बड़ी और अनिश्चितता का फायदा उठाकर कई बार मार्केट में सक्रिय फर्जी कंसल्टेंट्स छात्रों को गलत राह दिखाते नजर आते हैं। जिससे छात्रों का करियर खतरे में पड़ जाता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में छात्रों और अभिभावकों के लिए यह बेहद जरूरी हो गया है कि वे केवल प्रमाणित और पारदर्शी एजुकेशन कंपनियों की ही मदद लें, ताकि उन्हें सही मार्गदर्शन और डब्ल्यूएचओ (WHO) व एनएमसी (NMC) से मान्यता प्राप्त सही विदेशी यूनिवर्सिटीज मिल सकें।

एक जिम्मेदार एजुकेशन कंपनी के रूप में हमारा मानना है कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाने चाहिए, पूरी परीक्षा प्रणाली को आधुनिक डिजिटल फॉर्मेट में शिफ्ट करना चाहिए और ग्लोबल एजुकेशन फ्रेमवर्क को मजबूत करना चाहिए। हमारा एकमात्र उद्देश्य छात्रों के डॉक्टर बनने के सपने को सुरक्षित रखना है। विदेश जाने वाले ये छात्र वहाँ से विश्व-स्तरीय शिक्षा और ग्लोबल एक्सपीरियंस लेकर जब भारत लौटेंगे, तो वे नेक्स्ट (नेशनल एग्जिट टेस्ट) जैसी परीक्षाओं को पास करके यहीं देश के हेल्थकेयर सिस्टम को अपनी सेवाएं देंगे और इसे मजबूत बनाएंगे। इसलिए जब तक हमारा घरेलू सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो जाता, तब तक ग्लोबल यूनिवर्सिटीज भारतीय छात्रों के भविष्य को बचाने और देश को योग्य डॉक्टर्स देने का एक बेहतरीन और समयबद्ध जरिया बनी रहेंगी।

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