अलीगढ़/ हरदोई। जौनपुर थाना कोतवाली क्षेत्र में नाबालिग से छेड़छाड़ व दुष्कर्म के  मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) मन मोहन सिंह की अदालत ने स्पष्ट कहा कि दुष्कर्म पीड़िता से बाद में की शादी सजा से बचने का आधार नहीं। आरोपी को सुनाई दस साल की सजा,लगाया पांच हजार रुपए का अर्थदंड 

जानकारी के मुताबिक अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 14 जनवरी 2017 की रात्रि की है। उस समय पीड़िता की आयु लगभग 13 वर्ष 4 माह थी। इस दौरान छेड़छाड़ की तहरीर दी गई थी, पीड़िता की मेडिकल जांच के दौरान मामला दुष्कर्म में बदल गया था। आरोपी राजेश पुत्र कन्हैयालाल सक्सेना के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(झ) और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कराया गया था।

सुनवाई के दौरान, पीड़िता ने अपनी मुख्य परीक्षा में दुष्कर्म की पुष्टि की। हालांकि, बाद में प्रतिपरीक्षा में उसने बयान बदल दिए और आरोपी को अपना पति बताते हुए कहा कि उनके दो बच्चे भी हैं। पीड़िता के पिता ने भी अदालत में स्वीकार किया कि दोनों साथ रह रहे हैं और खुश हैं।

अदालत ने शैक्षणिक अभिलेखों के आधार पर पीड़िता को घटना के दौरान नाबालिग माना और छेड़छाड़ व दुष्कर्म का आरोप साबित होने पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नाबालिग की सहमति या बाद में हुआ विवाह कानूनन मान्य नहीं है। घर में अतिचार (धारा 452) का आरोप साक्ष्य के अभाव में साबित नहीं हो सका। परंतु बचाव पक्ष के 'झूठे मुकदमे' के तर्क को अदालत ने खारिज कर दिया। ज्ञात रहे कि पीड़िता के पिता ने अदालत को बताया कि आरोपी से शादी के बाद बेटी पर दो बच्चे हैं,और वह खुश हैं। न्यायालय ने शादी को अनुचित माना। यही कारण है कि आरोपी को सजा सुनाई। आरोपी को हिरासत में लेकर जिला सुधार  भेजा गया।

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